राजस्थान चिकित्सा विभाग में आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) नियम

राजस्थान चिकित्सा विभाग में आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) – Part-1

मूल अवधारणा, कानूनी स्थिति एवं सामान्य नियम


🔹 1. भूमिका (Introduction)

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत राज्य कर्मचारियों के लिए आकस्मिक अवकाश (Casual Leave – CL) एक आवश्यक सुविधा है, जो आकस्मिक, व्यक्तिगत अथवा तात्कालिक परिस्थितियों में प्रदान की जाती है।

हालाँकि आकस्मिक अवकाश को सामान्यतः कर्मचारी का अधिकार समझ लिया जाता है, परन्तु राजस्थान सेवा नियम, 1951 के अंतर्गत इसकी प्रकृति, सीमा और उपयोग के लिए स्पष्ट नियम, शर्तें एवं प्रतिबंध निर्धारित हैं।

महत्वपूर्ण: आकस्मिक अवकाश कोई अर्जित (Earned) अवकाश नहीं है और न ही यह सेवा का स्थायी अधिकार है।

🔹 2. आकस्मिक अवकाश की कानूनी स्थिति

राजस्थान सेवा नियम, 1951 के खंड-II, परिशिष्ट-I, अनुभाग-III के अनुसार:

  • आकस्मिक अवकाश को किसी नियम के अधीन मान्यता प्राप्त अवकाश नहीं माना गया है।
  • फिर भी, इसे राज्य सरकार द्वारा निर्धारित सीमाओं में सुविधा के रूप में प्रदान किया जाता है।
  • आकस्मिक अवकाश पर कर्मचारी को कर्तव्य पर उपस्थित माना जाता है और वेतन बाधित नहीं होता।

🔹 3. चिकित्सा विभाग में आकस्मिक अवकाश की वार्षिक सीमा

  • प्रत्येक स्थाई राज्य कर्मचारी को एक वर्ष में अधिकतम 15 दिन का आकस्मिक अवकाश देय है।
  • एक बार में 10 दिन से अधिक आकस्मिक अवकाश स्वीकृत नहीं किया जा सकता।
  • आधा दिन (Half Day) का आकस्मिक अवकाश भी स्वीकृत किया जा सकता है।
नोट: आकस्मिक अवकाश की सीमा पार करने पर अवकाश अवैतनिक माना जाएगा।

🔹 4. सेवा पुस्तिका एवं उपस्थिति अभिलेख

  • आकस्मिक अवकाश का सेवा पुस्तिका (Service Book) में कोई इंद्राज नहीं किया जाता।
  • इसकी प्रविष्टि केवल दैनिक उपस्थिति पंजिका में की जाती है।
  • निर्धारित अवधि तक उपयोग न करने पर CL स्वतः व्ययगत (Lapse) हो जाता है।

🔹 5. रविवार, राजकीय अवकाश एवं साप्ताहिक अवकाश

यदि आकस्मिक अवकाश की अवधि के पहले, बाद अथवा बीच में:

  • रविवार
  • राजकीय अवकाश

आता है, तो उसे आकस्मिक अवकाश का अंश नहीं माना जाएगा।


🔹 6. मुख्यालय छोड़ने से संबंधित प्रतिबंध

  • चिकित्सा विभाग का कोई भी राज्य कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति के मुख्यालय या जिला नहीं छोड़ सकता।
  • आकस्मिक अवकाश आवेदन में अवकाश अवधि का निवास पता अंकित करना अनिवार्य है।

🔹 7. आकस्मिक अवकाश का अन्य अवकाशों से संबंध

  • आकस्मिक अवकाश को अन्य किसी भी प्रकार के अवकाश के साथ निरंतरता में स्वीकृत नहीं किया जा सकता।
  • वेकेशन अवधि में आकस्मिक अवकाश स्वीकृत नहीं होता।

🔹 8. आकस्मिक अवकाश एवं अनुशासन

  • पूर्व स्वीकृति के बिना अनुपस्थिति को जानबूझकर अनुपस्थिति माना जा सकता है।
  • ऐसी अनुपस्थिति सेवा में व्यवधान (Interruption in Service) मानी जा सकती है।
  • अवधि से अधिक रुकने पर राजस्थान सिविल सेवा (CCA) नियम, 1958 के अंतर्गत कार्यवाही संभव है।

⚠️ DISCLAIMER (अस्वीकरण)

यह लेख राजस्थान सेवा नियम, 1951 एवं वित्त/चिकित्सा विभाग द्वारा समय-समय पर जारी आदेशों पर आधारित है। किसी भी स्थिति में राज्य सरकार द्वारा जारी नवीनतम आदेश, परिपत्र एवं अधिसूचना ही अंतिम रूप से मान्य होंगे। कर्मचारियों को व्यक्तिगत निर्णय से पूर्व संबंधित विभागीय आदेश अवश्य देखने चाहिए।

✍️ Arjun Hansaliya
(सूचना एवं जागरूकता हेतु)

राजस्थान चिकित्सा विभाग में आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) – Part-2

विभिन्न संवर्गों में आकस्मिक अवकाश की देयता एवं विभागीय व्यवहार


🔹 1. भूमिका

राजस्थान का चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग एक निरंतर सेवा देने वाला (24×7) विभाग है, जहाँ राजकीय अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, उप-स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आमजन को सतत स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करते हैं।

इस विभाग की कार्यप्रणाली को देखते हुए आकस्मिक अवकाश (Casual Leave – CL) का प्रयोग अन्य विभागों की तुलना में अधिक अनुशासन, आवश्यकता एवं सेवा हित को ध्यान में रखकर किया जाता है।


🔹 2. चिकित्सा विभाग में “संवर्ग” की अवधारणा

चिकित्सा विभाग में कार्यरत राज्य कर्मचारी विभिन्न संवर्गों में वर्गीकृत होते हैं, परन्तु आकस्मिक अवकाश की मूल देयता राजस्थान सेवा नियम, 1951 के अंतर्गत सभी पर समान रूप से लागू होती है।

संवर्ग चाहे अलग-अलग हों, आकस्मिक अवकाश की प्रकृति, सीमा एवं शर्तें सामान्यतः एक-सी रहती हैं।


🔹 3. चिकित्सा विभाग में कार्यरत प्रमुख संवर्ग (सामूहिक दृष्टि)

  • राजकीय अस्पतालों में कार्यरत स्वास्थ्य सेवाकर्मी
  • मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध कार्मिक
  • प्राथमिक / सामुदायिक / उप-स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ कर्मचारी
  • तकनीकी, पैरामेडिकल एवं सहायक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारी
  • औषधि, प्रयोगशाला, रेडियोलॉजी, रक्तकोष एवं अन्य सहायक इकाइयों में कार्यरत कार्मिक
  • चिकित्सा संस्थानों से संबद्ध मंत्रालयिक एवं प्रशासनिक कर्मचारी
स्पष्टता: इन सभी संवर्गों के लिए आकस्मिक अवकाश की मूल सीमा, नियम एवं प्रतिबंध एक समान रूप से लागू होते हैं।

🔹 4. वार्षिक आकस्मिक अवकाश – चिकित्सा विभाग में स्थिति

  • प्रत्येक स्थाई राज्य कर्मचारी को एक वर्ष में अधिकतम 15 दिन का आकस्मिक अवकाश देय है।
  • एक बार में 10 दिन से अधिक आकस्मिक अवकाश स्वीकृत नहीं किया जा सकता।
  • आधा दिन (Half Day) का आकस्मिक अवकाश भी अनुमन्य है।

यह सीमा चिकित्सा विभाग के सभी संवर्गों पर समान रूप से लागू होती है।


🔹 5. चिकित्सा संस्थानों में सेवा-हित का सिद्धांत

चिकित्सा विभाग में आकस्मिक अवकाश स्वीकृत करते समय सेवा हित (Public Interest) को सर्वोपरि रखा जाता है।

  • आपातकालीन सेवाएँ
  • आईसीयू, वार्ड, ओपीडी, इमरजेंसी
  • ऑपरेशन थियेटर, लेबर रूम
  • महामारी, विशेष स्वास्थ्य अभियान

इन परिस्थितियों में सक्षम अधिकारी को यह अधिकार है कि आवश्यकतानुसार आकस्मिक अवकाश स्थगित या अस्वीकृत कर सके।


🔹 6. मुख्यालय न छोड़ने की बाध्यता

  • चिकित्सा विभाग का कोई भी कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति के मुख्यालय या जिला नहीं छोड़ सकता।
  • आकस्मिक अवकाश आवेदन में निवास/ठहराव का पता अंकित करना अनिवार्य है।
  • विशेष रूप से अस्पताल आधारित पदस्थापन में यह शर्त अत्यंत महत्वपूर्ण है।

🔹 7. आकस्मिक अवकाश एवं अस्पताल आधारित ड्यूटी

चिकित्सा संस्थानों में ड्यूटी व्यवस्था रोस्टर आधारित होती है। इस कारण:

  • ड्यूटी रोस्टर के अनुसार CL का समायोजन किया जाता है।
  • ड्यूटी की निरंतरता भंग न हो, यह सुनिश्चित किया जाता है।
  • एक साथ अधिक कर्मचारियों को CL देना सामान्यतः टाला जाता है।

🔹 8. आकस्मिक अवकाश एवं आकस्मिक परिस्थितियाँ

चिकित्सा विभाग में आकस्मिक अवकाश प्रायः निम्न कारणों से लिया जाता है:

  • स्वयं की अचानक बीमारी
  • परिवार में गंभीर चिकित्सा स्थिति
  • अंत्येष्टि / गंभीर पारिवारिक आपात स्थिति

इन परिस्थितियों में, यदि पूर्व स्वीकृति संभव न हो, तो बाद में सक्षम अधिकारी द्वारा Ex-post-facto स्वीकृति दी जा सकती है।


🔹 9. आकस्मिक अवकाश और उपस्थिति अभिलेख

  • आकस्मिक अवकाश का सेवा पुस्तिका में कोई इंद्राज नहीं होता।
  • दैनिक उपस्थिति पंजिका / रोस्टर रजिस्टर में प्रविष्टि की जाती है।
  • डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू होने पर वही अभिलेख मान्य होगा।

🔹 10. अवकाश का दुरुपयोग एवं विभागीय दृष्टिकोण

चिकित्सा विभाग में आकस्मिक अवकाश के दुरुपयोग को गंभीरता से लिया जाता है, क्योंकि इसका सीधा प्रभाव रोगी-सेवा पर पड़ता है।

  • बार-बार CL लेना
  • बिना अनुमति अनुपस्थिति

ऐसी स्थिति में सक्षम अधिकारी द्वारा अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सकती है।


🔹 11. आकस्मिक अवकाश और सेवा अनुशासन

  • बिना स्वीकृति अनुपस्थिति को जानबूझकर अनुपस्थिति माना जा सकता है।
  • यह सेवा में व्यवधान (Interruption) की श्रेणी में आ सकती है।
  • राजस्थान सिविल सेवा (CCA) नियम, 1958 के अंतर्गत कार्यवाही संभव है।

⚠️ DISCLAIMER (अस्वीकरण)

यह लेख केवल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संदर्भ में राजस्थान सेवा नियम, 1951 एवं संबंधित विभागीय आदेशों के अध्ययन पर आधारित है। समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा जारी नवीनतम आदेश, परिपत्र एवं अधिसूचना ही अंतिम एवं वैधानिक रूप से मान्य होंगे।

✍️ Arjun Hansaliya
(सूचना एवं विभागीय जागरूकता हेतु)

राजस्थान चिकित्सा विभाग में आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) – Part-3

नव नियुक्त, प्रोबेशन अवधि, नियमितीकरण एवं आकस्मिक अवकाश


🔹 1. भूमिका

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के बीच नव नियुक्ति, प्रोबेशन अवधि एवं नियमितीकरण के दौरान आकस्मिक अवकाश (Casual Leave – CL) को लेकर सबसे अधिक भ्रम, गलतफहमियाँ एवं विरोधाभासी धारणाएँ पाई जाती हैं।

इस भाग का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि राजस्थान सेवा नियम, 1951 के अंतर्गत इन अवस्थाओं में आकस्मिक अवकाश की कानूनी स्थिति, देयता एवं सीमाएँ क्या हैं।


🔹 2. “नव नियुक्त कर्मचारी” की स्थिति

नव नियुक्त कर्मचारी वह होता है जो:

  • राजकीय सेवा में प्रथम बार नियुक्त हुआ हो, अथवा
  • नियमित नियुक्ति आदेश प्राप्त कर कार्यभार ग्रहण कर चुका हो।

ऐसे कर्मचारी के लिए आकस्मिक अवकाश की देयता कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रारंभ होती है।


🔹 3. अपूर्ण वर्ष में आकस्मिक अवकाश की गणना

यदि कोई कर्मचारी वर्ष के मध्य में नियुक्त होता है, तो उसे पूर्ण 15 दिन का आकस्मिक अवकाश तुरंत देय नहीं होता।

नियम:
अपूर्ण वर्ष में आकस्मिक अवकाश की गणना प्रत्येक पूर्ण माह पर 1.25 दिन की दर से की जाती है।

अर्थात:

  • 1 पूर्ण माह की सेवा = 1.25 दिन CL
  • 8 पूर्ण माह की सेवा = 10 दिन CL (लगभग)

अपूर्ण माह की गणना नहीं की जाती।


🔹 4. प्रोबेशन अवधि में आकस्मिक अवकाश

राजस्थान सेवा नियम, 1951 के अंतर्गत प्रोबेशन अवधि में कार्यरत कर्मचारी को राजकीय सेवा में कार्यरत कर्मचारी ही माना जाता है।

इसलिए:

  • प्रोबेशन अवधि में भी आकस्मिक अवकाश देय होता है।
  • CL की वार्षिक अधिकतम सीमा वही रहती है (15 दिन)।
  • CL सेवा पुस्तिका में दर्ज नहीं किया जाता।
स्पष्टता:
प्रोबेशन अवधि में आकस्मिक अवकाश पर कोई पृथक प्रतिबंध नहीं है, परंतु इसका उपयोग सेवा अनुशासन के अधीन होता है।

🔹 5. प्रोबेशन अवधि में अन्य अवकाशों की स्थिति

यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर समझना आवश्यक है:

  • आकस्मिक अवकाश – अनुमन्य
  • अन्य अर्जित/दीर्घकालिक अवकाश – सामान्यतः अर्जित नहीं होते

राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 122 (ए) के अनुसार, प्रोबेशन अवधि में कर्मचारी अन्य प्रकार के अवकाश अर्जित नहीं करता, परंतु आकस्मिक अवकाश इससे पृथक है।


🔹 6. नियमितीकरण एवं आकस्मिक अवकाश

जब किसी कर्मचारी का नियमितीकरण हो जाता है, तो:

  • आकस्मिक अवकाश की वार्षिक सीमा यथावत रहती है।
  • पूर्व में लिए गए CL का कोई पृथक समायोजन नहीं किया जाता।
  • नया “CL खाता” नहीं खोला जाता।

आकस्मिक अवकाश हर वर्ष स्वतः नवीनीकृत होता है, किन्तु अप्रयुक्त CL अगले वर्ष में नहीं जुड़ता।


🔹 7. प्रोबेशन अवधि में CL का दुरुपयोग

चिकित्सा विभाग में प्रोबेशन अवधि को सेवा परीक्षण अवधि माना जाता है।

इसलिए:

  • बार-बार आकस्मिक अवकाश लेना
  • बिना स्वीकृति अनुपस्थिति

इन परिस्थितियों में सक्षम अधिकारी द्वारा:

  • प्रोबेशन अवधि बढ़ाई जा सकती है
  • प्रतिकूल प्रविष्टि दी जा सकती है
  • अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है

🔹 8. चिकित्सा विभाग में व्यवहारिक स्थिति

चिकित्सा संस्थानों में यह देखा गया है कि प्रोबेशन अवधि में:

  • CL केवल वास्तविक आवश्यकता पर ही स्वीकृत किया जाता है।
  • आपातकालीन सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों से अधिक सतर्कता अपेक्षित होती है।
  • सेवा हित सर्वोपरि माना जाता है।

🔹 9. प्रोबेशन अवधि समाप्ति और सेवा निरंतरता

यदि कर्मचारी:

  • स्वीकृत आकस्मिक अवकाश पर रहता है – सेवा निरंतर मानी जाती है।
  • बिना स्वीकृति अनुपस्थित रहता है – सेवा में व्यवधान माना जा सकता है।

यह व्यवधान आगे चलकर:

  • वरिष्ठता
  • पदोन्नति
  • वेतन वृद्धि

पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।


🔹 10. सारांश (Summary)

  • नव नियुक्त एवं प्रोबेशन कर्मचारी को CL देय है।
  • अपूर्ण वर्ष में CL की गणना 1.25 दिन प्रति माह से होती है।
  • CL सेवा पुस्तिका में दर्ज नहीं होता।
  • प्रोबेशन अवधि में CL का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है।

⚠️ DISCLAIMER (अस्वीकरण)

यह लेख राजस्थान सेवा नियम, 1951 तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से संबंधित विभागीय आदेशों के सामान्य अध्ययन पर आधारित है। किसी भी स्थिति में राज्य सरकार द्वारा जारी नवीनतम आदेश/परिपत्र/अधिसूचना ही अंतिम रूप से मान्य होंगे।

✍️ Arjun Hansaliya
(सूचना एवं विभागीय जागरूकता हेतु)

राजस्थान चिकित्सा विभाग में आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) – Part-4

विशेष आकस्मिक अवकाश (Special Casual Leave) : नियम, परिस्थितियाँ एवं विभागीय उपयोग


🔹 1. भूमिका

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत राज्य कर्मचारियों के लिए कुछ ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, जहाँ सामान्य आकस्मिक अवकाश (Casual Leave – CL) पर्याप्त नहीं होता।

ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा विशेष आकस्मिक अवकाश (Special Casual Leave – SCL) का प्रावधान किया गया है, जिसका उद्देश्य सेवा में व्यवधान के बिना कर्मचारी को वैधानिक राहत प्रदान करना है।


🔹 2. विशेष आकस्मिक अवकाश की कानूनी स्थिति

विशेष आकस्मिक अवकाश राजस्थान सेवा नियम, 1951 के अंतर्गत विभिन्न वित्त एवं विभागीय आदेशों द्वारा नियंत्रित होता है।

  • यह सामान्य आकस्मिक अवकाश से पृथक श्रेणी का अवकाश है।
  • इसकी गणना वार्षिक 15 दिन की सीमा में नहीं की जाती।
  • यह केवल निर्दिष्ट परिस्थितियों में ही स्वीकृत किया जाता है।

🔹 3. चिकित्सा विभाग में विशेष आकस्मिक अवकाश की प्रमुख श्रेणियाँ

🔸 (क) चिकित्सा / स्वास्थ्य संबंधी विशेष परिस्थितियाँ

  • कर्मचारी का स्वयं का बन्ध्याकरण (पुरुष / महिला)
  • पत्नी के बन्ध्याकरण पर पुरुष कर्मचारी को अवकाश
  • संक्रामक रोग की स्थिति में निरोधावकाश
देयता:
  • महिला कर्मचारी – 14 दिन
  • पुरुष कर्मचारी – 6 / 7 दिन (स्थिति अनुसार)
  • संक्रामक रोग – अधिकतम 21 दिन

🔸 (ख) शैक्षणिक एवं विभागीय कार्य

  • चिकित्सा परिषद, बोर्ड, समिति की बैठक
  • राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • सेमिनार, कार्यशाला, कॉन्फ्रेंस
  • निरीक्षण, परीक्षा ड्यूटी, चयन प्रक्रिया से संबंधित कार्य

ऐसे मामलों में स्वीकृत विशेष आकस्मिक अवकाश कर्तव्य पर उपस्थित माने जाने के समतुल्य होता है।


🔸 (ग) आपातकालीन एवं विशेष सेवा परिस्थितियाँ

  • महामारी, आपदा, विशेष स्वास्थ्य अभियान
  • राज्य / जिला स्तर पर स्वास्थ्य आपातकाल
  • विशेष टीकाकरण / सर्वेक्षण अभियान

इन परिस्थितियों में अवकाश की स्वीकृति पूरी तरह सक्षम अधिकारी के विवेकाधिकार पर निर्भर करती है।


🔸 (घ) खेल एवं प्रतिनिधित्व से संबंधित अवकाश

  • राज्य / जिला स्तर की खेल प्रतियोगिताएँ
  • राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताएँ
देयता:
राज्य स्तर – 10 दिन
राष्ट्रीय स्तर – 30 दिन (एक कैलेंडर वर्ष में)

🔹 4. विशेष आकस्मिक अवकाश और चिकित्सा संस्थानों की व्यावहारिक स्थिति

चिकित्सा विभाग में SCL स्वीकृत करते समय निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है:

  • सेवा की अनिवार्यता
  • रोगी-सेवा पर प्रभाव
  • उपलब्ध मानव संसाधन
  • आपातकालीन सेवाओं की निरंतरता

🔹 5. विशेष आकस्मिक अवकाश एवं उपस्थिति अभिलेख

  • SCL को सामान्य आकस्मिक अवकाश की तरह सेवा पुस्तिका में दर्ज नहीं किया जाता।
  • उपस्थिति पंजिका में इसे पृथक रूप से दर्शाया जाता है।
  • ड्यूटी पर उपस्थित माना जाता है।

🔹 6. SCL के साथ अन्य अवकाश

  • विशेष आकस्मिक अवकाश को अन्य अवकाशों के साथ स्वतः नहीं जोड़ा जाता।
  • आवश्यकता होने पर सक्षम अधिकारी का विशेष अनुमोदन आवश्यक होता है।

🔹 7. विशेष आकस्मिक अवकाश का दुरुपयोग

यदि कोई कर्मचारी:

  • अनुमोदित उद्देश्य के अतिरिक्त SCL का उपयोग करता है
  • गलत तथ्य प्रस्तुत करता है

तो यह कदाचार (Misconduct) की श्रेणी में आ सकता है, जिस पर विभागीय कार्यवाही संभव है।


🔹 8. सारांश

  • विशेष आकस्मिक अवकाश सामान्य CL से अलग श्रेणी है।
  • यह केवल निर्दिष्ट परिस्थितियों में ही देय है।
  • यह वार्षिक 15 दिन की सीमा में शामिल नहीं होता।
  • चिकित्सा विभाग में इसका उपयोग सेवा-हित के अधीन होता है।

⚠️ DISCLAIMER (अस्वीकरण)

यह लेख राजस्थान सेवा नियम, 1951 एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न आदेशों के अध्ययन पर आधारित है। किसी भी स्थिति में राज्य सरकार द्वारा जारी नवीनतम आदेश/परिपत्र/अधिसूचना ही अंतिम एवं मान्य होंगे।

✍️ Arjun Hansaliya
(सूचना एवं विभागीय जागरूकता हेतु)

राजस्थान चिकित्सा विभाग में आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) – Part-5

अनुशासन, अनुपस्थिति, Over-stayal एवं CCA Rules का प्रभाव


🔹 1. भूमिका

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग एक ऐसा विभाग है, जहाँ कर्मचारी की अनुपस्थिति का सीधा प्रभाव रोगी-सेवा, आपातकालीन उपचार और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।

इसी कारण आकस्मिक अवकाश (Casual Leave – CL) से संबंधित अनुशासनात्मक प्रावधानों को अन्य विभागों की तुलना में अधिक गंभीरता से देखा जाता है।


🔹 2. आकस्मिक अवकाश और सेवा अनुशासन का संबंध

आकस्मिक अवकाश सुविधा अवश्य है, परंतु यह अनुशासनहीनता की ढाल नहीं है।

  • CL केवल वास्तविक एवं अपरिहार्य परिस्थितियों के लिए है।
  • सेवा-हित (Public Interest) सदैव सर्वोपरि है।
  • सक्षम अधिकारी को अवकाश स्वीकृत या अस्वीकृत करने का अधिकार है।

🔹 3. बिना स्वीकृति अनुपस्थिति (Unauthorised Absence)

यदि कोई चिकित्सा विभाग का कर्मचारी:

  • बिना अवकाश स्वीकृति ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होता, या
  • स्वीकृत अवधि समाप्त होने के बाद भी कार्य पर उपस्थित नहीं होता

तो इसे बिना स्वीकृति अनुपस्थिति माना जाता है।

महत्वपूर्ण:
बीमारी या आपातकाल की स्थिति में भी यथाशीघ्र सूचना देना आवश्यक होता है।

🔹 4. Over-stayal क्या है?

जब कोई कर्मचारी:

  • स्वीकृत आकस्मिक अवकाश अवधि से अधिक समय तक अनुपस्थित रहता है,
  • और अतिरिक्त अवधि के लिए स्वीकृति प्राप्त नहीं करता

तो इसे Over-stayal of Leave कहा जाता है।


🔹 5. Over-stayal का चिकित्सा विभाग में प्रभाव

Over-stayal को चिकित्सा विभाग में गंभीर लापरवाही के रूप में देखा जाता है, क्योंकि:

  • ड्यूटी रोस्टर प्रभावित होता है
  • अन्य कर्मचारियों पर अतिरिक्त भार पड़ता है
  • रोगी-सेवा बाधित होती है

इस कारण Over-stayal को कदाचार (Misconduct) माना जा सकता है।


🔹 6. राजस्थान सिविल सेवा (CCA) नियम, 1958 का प्रभाव

राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों पर पूर्ण रूप से लागू होते हैं।

इन नियमों के अंतर्गत:

  • अनधिकृत अनुपस्थिति
  • बार-बार आकस्मिक अवकाश का दुरुपयोग
  • Over-stayal

पर विभागीय कार्यवाही की जा सकती है।


🔹 7. संभावित विभागीय कार्यवाहियाँ

स्थिति की गंभीरता के अनुसार निम्न कार्यवाहियाँ संभव हैं:

  • मौखिक / लिखित चेतावनी
  • प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry)
  • वेतन वृद्धि रोकना
  • वेतन कटौती
  • प्रोबेशन अवधि बढ़ाना (यदि लागू हो)
  • CCA Rules के अंतर्गत दंडात्मक कार्यवाही

🔹 8. आकस्मिक अवकाश और सेवा में व्यवधान (Interruption)

स्वीकृत आकस्मिक अवकाश:

  • सेवा में व्यवधान नहीं माना जाता
  • वेतन व सेवा निरंतरता बनी रहती है

परंतु:

  • बिना स्वीकृति अनुपस्थिति
  • लंबा Over-stayal

सेवा में व्यवधान की श्रेणी में आ सकता है, जिसका प्रभाव:

  • वरिष्ठता
  • पदोन्नति
  • भविष्य की सेवा-सुविधाओं

पर पड़ सकता है।


🔹 9. चिकित्सा संस्थानों में व्यवहारिक उदाहरण

  • आपातकालीन वार्ड में ड्यूटी छोड़ना – गंभीर अनुशासनहीनता
  • बार-बार त्यौहार/साप्ताहिक अवकाश के साथ CL जोड़ना – संदेहास्पद
  • सूचना दिए बिना अनुपस्थिति – कदाचार की श्रेणी

🔹 10. कर्मचारियों के लिए व्यवहारिक सुझाव

  • CL का उपयोग केवल वास्तविक आवश्यकता में करें
  • हर स्थिति में यथाशीघ्र सूचना दें
  • Over-stayal से पूर्णतः बचें
  • सेवा-हित को प्राथमिकता दें

🔹 11. सारांश

  • आकस्मिक अवकाश अनुशासन के अधीन है
  • बिना स्वीकृति अनुपस्थिति दंडनीय है
  • Over-stayal पर CCA Rules लागू हो सकते हैं
  • चिकित्सा विभाग में CL का दुरुपयोग गंभीर परिणाम ला सकता है

⚠️ DISCLAIMER (अस्वीकरण)

यह लेख राजस्थान सेवा नियम, 1951, राजस्थान सिविल सेवा (CCA) नियम, 1958 तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से संबंधित विभागीय आदेशों के सामान्य अध्ययन पर आधारित है। किसी भी स्थिति में राज्य सरकार द्वारा जारी नवीनतम आदेश/परिपत्र/अधिसूचना ही अंतिम एवं मान्य होंगे।

✍️ Arjun Hansaliya
(सूचना एवं विभागीय जागरूकता हेतु)

राजस्थान चिकित्सा विभाग में आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) – Part-6

FAQ, प्रैक्टिकल उदाहरण, सामान्य गलतियाँ एवं निष्कर्ष


🔹 1. भूमिका (Why this Part is Important)

राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में आकस्मिक अवकाश (Casual Leave – CL) को लेकर अधिकांश समस्याएँ नियमों की अस्पष्ट समझ, व्यावहारिक स्थितियों और गलत धारणाओं के कारण उत्पन्न होती हैं।

इस अंतिम भाग का उद्देश्य है:

  • सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQ) के उत्तर देना
  • अस्पताल आधारित वास्तविक परिस्थितियों को समझाना
  • सामान्य गलतियों से कर्मचारियों को सचेत करना
  • पूरी सीरीज़ का सार प्रस्तुत करना

🔹 2. Frequently Asked Questions (FAQ)

❓ Q1. क्या आकस्मिक अवकाश कर्मचारी का अधिकार है?

नहीं। आकस्मिक अवकाश अर्जित अधिकार नहीं है। यह राज्य सरकार द्वारा प्रदत्त एक सुविधा है, जो सेवा-हित और विभागीय आवश्यकता के अधीन होती है।

❓ Q2. क्या चिकित्सा विभाग में CL कभी भी रोका जा सकता है?

हाँ। आपातकाल, महामारी, स्टाफ की कमी, विशेष अभियान या रोगी-सेवा प्रभावित होने की स्थिति में सक्षम अधिकारी CL स्थगित या अस्वीकृत कर सकता है।

❓ Q3. क्या CL को PL या अन्य अवकाश के साथ जोड़ा जा सकता है?

नहीं। सामान्यतः आकस्मिक अवकाश को अन्य अवकाशों के साथ निरंतरता में स्वीकृत नहीं किया जाता।

❓ Q4. क्या आकस्मिक अवकाश सेवा पुस्तिका में दर्ज होता है?

नहीं। CL का कोई इंद्राज सेवा पुस्तिका में नहीं किया जाता। यह केवल उपस्थिति पंजिका / रोस्टर में दर्ज होता है।

❓ Q5. क्या बिना सूचना के बीमारी में CL मान्य हो सकता है?

आपात स्थिति में पूर्व स्वीकृति संभव न हो, तो यथाशीघ्र सूचना देना अनिवार्य है। बिना सूचना अनुपस्थिति अनुशासनहीनता मानी जा सकती है।


🔹 3. चिकित्सा विभाग आधारित प्रैक्टिकल उदाहरण (Practical Cases)

🔸 उदाहरण–1: आपातकालीन वार्ड में अनुपस्थिति

यदि कोई कर्मचारी इमरजेंसी/ICU ड्यूटी पर तैनात है और बिना पूर्व सूचना CL लेकर अनुपस्थित रहता है, तो इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना जा सकता है।

🔸 उदाहरण–2: स्वीकृत CL के बाद लौटने में देरी

यदि कर्मचारी स्वीकृत CL समाप्त होने के बाद भी ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होता और अतिरिक्त अवधि की स्वीकृति नहीं लेता, तो यह Over-stayal होगा।

🔸 उदाहरण–3: त्यौहार + रविवार + CL पैटर्न

बार-बार त्योहार के साथ CL जोड़ना सक्षम अधिकारी के संज्ञान में आने पर दुरुपयोग की श्रेणी में आ सकता है।

🔸 उदाहरण–4: प्रोबेशन अवधि में अत्यधिक CL

प्रोबेशन अवधि सेवा परीक्षण की अवधि होती है। इस दौरान अत्यधिक CL लेने पर प्रोबेशन बढ़ाया जा सकता है या प्रतिकूल टिप्पणी दी जा सकती है।


🔹 4. चिकित्सा विभाग में देखी जाने वाली सामान्य गलतियाँ

  • CL को “अधिकार” समझ लेना
  • बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ देना
  • सूचना दिए बिना अनुपस्थित रहना
  • CL को अन्य अवकाशों के साथ जोड़ने का प्रयास
  • हर वर्ष CL बचाकर रखने की गलतफहमी
ध्यान दें: अप्रयुक्त आकस्मिक अवकाश अगले वर्ष में नहीं जुड़ता।

🔹 5. कर्मचारियों के लिए व्यवहारिक दिशानिर्देश

  • CL केवल वास्तविक व अपरिहार्य परिस्थितियों में लें
  • हर स्थिति में सक्षम अधिकारी को समय पर सूचना दें
  • ड्यूटी रोस्टर का सम्मान करें
  • Over-stayal से पूरी तरह बचें
  • लिखित स्वीकृति/रिकॉर्ड सुरक्षित रखें

🔹 6. विभागीय दृष्टिकोण (Administrative Perspective)

चिकित्सा विभाग CL को केवल अवकाश के रूप में नहीं, बल्कि सेवा-प्रबंधन का उपकरण मानता है।

प्रशासन का उद्देश्य:

  • रोगी-सेवा की निरंतरता
  • मानव संसाधन का संतुलन
  • अनुशासन एवं जवाबदेही

इसी कारण CL के उपयोग में विवेक, संतुलन और पारदर्शिता अपेक्षित होती है।


🔹 7. पूरी सीरीज़ का सार (Series Summary)

  • आकस्मिक अवकाश सुविधा है, अधिकार नहीं
  • चिकित्सा विभाग में सेवा-हित सर्वोपरि है
  • बिना स्वीकृति अनुपस्थिति दंडनीय हो सकती है
  • Over-stayal पर CCA Rules लागू हो सकते हैं
  • नवीनतम सरकारी आदेश ही अंतिम रूप से मान्य होते हैं

📌 निष्कर्ष (Conclusion)

राजस्थान चिकित्सा विभाग में आकस्मिक अवकाश एक आवश्यक सुविधा है, परंतु इसका विवेकहीन उपयोग सेवा, अनुशासन और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

यदि कर्मचारी नियमों को समझकर, जिम्मेदारी के साथ CL का उपयोग करे, तो न केवल सेवा सुचारु रहती है, बल्कि प्रशासनिक टकराव से भी बचा जा सकता है।


⚠️ DISCLAIMER (अस्वीकरण)

यह संपूर्ण लेख श्रृंखला राजस्थान सेवा नियम, 1951, राजस्थान सिविल सेवा (CCA) नियम, 1958 एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न आदेशों के सामान्य अध्ययन पर आधारित है। किसी भी स्थिति में राज्य सरकार द्वारा जारी नवीनतम आदेश, परिपत्र एवं अधिसूचना ही अंतिम व वैधानिक रूप से मान्य होंगे।

✍️ Arjun Hansaliya
(सूचना, जागरूकता एवं विभागीय समझ हेतु)

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