जब झारखंड में नर्सिंग निदेशालय बन सकता है, तो राजस्थान में क्यों नहीं? नर्सिंग पदोन्नति और कैडर सुधार पर नीति-आधारित विश्लेषण

जब झारखंड में नर्सिंग निदेशालय बन सकता है तो राजस्थान में क्यों नहीं | नर्सिंग पदोन्नति का स्थायी समाधान

🔴 जब झारखंड में नर्सिंग निदेशालय बन सकता है, तो राजस्थान में क्यों नहीं?

✍️ By Arjun Hansaliya

सारांश (Overview):
यह लेख किसी व्यक्ति, पदाधिकारी या विभाग के विरुद्ध नहीं है। यह लेख नर्सिंग संवर्ग की पदोन्नति, कैडर संरचना, प्रशासनिक स्वतंत्रता और राजस्थान में नर्सिंग निदेशालय की आवश्यकता पर एक नीति-आधारित, संतुलित और तथ्यात्मक विमर्श प्रस्तुत करता है।

भूमिका : पदोन्नति सूची के बाद उठता असली सवाल

हाल ही में जारी पदोन्नति सूची में जिन नर्सिंग साथियों को पदोन्नति प्राप्त हुई है, वे निश्चित रूप से बधाई के पात्र हैं। यह उनके वर्षों के अनुभव, सेवा और धैर्य का सम्मान है।

लेकिन इसी खुशी के साथ एक गंभीर और असहज प्रश्न भी सामने आता है —

क्या यह पदोन्नति व्यवस्था पूरे नर्सिंग संवर्ग के लिए न्यायपूर्ण, समयबद्ध और सम्मानजनक है?

यदि ईमानदारी से देखा जाए, तो उत्तर अक्सर “नहीं” में मिलता है। यही वह बिंदु है जहाँ से नर्सिंग निदेशालय की आवश्यकता समझ में आती है।

नर्सिंग : केवल सहायक स्टाफ नहीं, एक स्वतंत्र प्रोफेशन

भारत सहित कई राज्यों में नर्सिंग को लंबे समय तक “सहायक स्टाफ” की श्रेणी में देखा गया। जबकि आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में नर्सिंग की भूमिका केवल डॉक्टर की सहायता तक सीमित नहीं है।

वास्तविकता यह है कि नर्सिंग:
  • एक स्वतंत्र प्रोफेशन है
  • जिसकी अपनी शिक्षा प्रणाली है
  • स्वतंत्र कैडर संरचना है
  • और विशिष्ट प्रशासनिक जरूरतें हैं

इसी तथ्य को जब कोई सरकार नीति स्तर पर स्वीकार करती है, तभी नर्सिंग व्यवस्था में वास्तविक सुधार संभव होता है।

1️⃣ झारखंड मॉडल : नर्सिंग निदेशालय कैसे और क्यों बना?

झारखंड सरकार ने यह स्वीकार किया कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करना है, तो नर्सिंग को केवल चिकित्सा व्यवस्था के अधीन रखना पर्याप्त नहीं है।

झारखंड सरकार की नीति सोच

✔️ नर्सिंग को स्वतंत्र प्रोफेशन के रूप में मान्यता ✔️ नर्सिंग शिक्षा, कैडर और प्रशासन को एकीकृत करना ✔️ पदोन्नति और मानव संसाधन प्रबंधन को व्यवस्थित करना

झारखंड में उठाए गए ठोस कदम

  • स्वतंत्र नर्सिंग निदेशालय का गठन
  • निदेशक एवं संयुक्त निदेशक (नर्सिंग) पदों का सृजन
  • नर्सिंग कॉलेज, कोर्स, गुणवत्ता नियंत्रण एक छत के नीचे

झारखंड मॉडल का प्रत्यक्ष प्रभाव

  • पदोन्नति प्रक्रिया अधिक नियमित और पारदर्शी हुई
  • नर्सिंग शिक्षा पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ
  • कैडर मैनेजमेंट और प्लानिंग बेहतर हुई

2️⃣ राजस्थान में नर्सिंग निदेशालय क्यों नहीं बन पाया?

यह प्रश्न भावनात्मक नहीं, बल्कि पूरी तरह प्रशासनिक और संरचनात्मक है।

(A) प्रशासनिक निर्भरता

राजस्थान में नर्सिंग व्यवस्था वर्तमान में चिकित्सा विभाग के अंतर्गत संचालित है। इस बड़े प्रशासनिक ढांचे में नर्सिंग से जुड़े विषय कई बार अपेक्षित प्राथमिकता नहीं पा पाते।

(B) संगठित नीति-स्तरीय दबाव का अभाव

मांग वर्षों से है, लेकिन निरंतर, एकजुट और दस्तावेज़-आधारित प्रस्तुति अक्सर सीमित रही है।

(C) बिखरा हुआ प्रतिनिधित्व

अनेक संगठन, अनेक मंच और अलग-अलग एजेंडे सरकार के लिए निर्णय को टालना आसान बना देते हैं।

(D) स्पष्ट नीति ड्राफ्ट की कमी

सरकार द्वारा अक्सर पूछा जाता है:
  • निदेशालय का ढांचा क्या होगा?
  • खर्च कितना आएगा?
  • अधिकार क्षेत्र क्या होगा?

इन प्रश्नों के ठोस, लिखित और व्यवहारिक उत्तर अभी भी सीमित हैं।

3️⃣ राजस्थान में नर्सिंग निदेशालय बनने की संभावित प्रक्रिया

चरण 1️⃣ : विभागीय प्रस्ताव और कैबिनेट स्वीकृति

स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग की सहमति के बाद कैबिनेट स्तर पर निर्णय लिया जा सकता है।

चरण 2️⃣ : पद सृजन

  • निदेशक (नर्सिंग)
  • संयुक्त निदेशक
  • डिप्टी डायरेक्टर
  • प्रशासनिक स्टाफ

चरण 3️⃣ : सेवा एवं प्रशासनिक नियम

DPC, DACP, कैडर स्ट्रक्चर, पदोन्नति टाइमलाइन और निरीक्षण अधिकार स्पष्ट किए जा सकते हैं।

चरण 4️⃣ : कार्यों का समेकन

नर्सिंग शिक्षा, पोस्टिंग, पदोन्नति, कॉलेज मान्यता जैसे विषय एक ही निदेशालय के अंतर्गत लाए जा सकते हैं।

4️⃣ पदोन्नति समस्या का स्थायी समाधान क्यों है नर्सिंग निदेशालय?

वर्तमान समस्याएं:
  • DPC वर्षों तक लंबित
  • DACP का अभाव
  • सीमित पद
  • 30–35 वर्ष सेवा के बाद भी बिना पदोन्नति सेवानिवृत्ति
निदेशालय बनने पर संभावित सुधार:
  • समयबद्ध DPC
  • DACP लागू
  • कैडर विस्तार
  • सम्मानजनक करियर ग्रोथ

5️⃣ यह खर्च नहीं, दीर्घकालिक निवेश क्यों है?

नर्सिंग निदेशालय पर होने वाला व्यय दरअसल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, कर्मचारियों की संतुष्टि और मानव संसाधन के बेहतर उपयोग में निवेश है।

🔴 अंतिम विचार

जब झारखंड जैसे राज्य में नर्सिंग निदेशालय संभव है, तो राजस्थान जैसे बड़े और संसाधन सम्पन्न राज्य में इस पर नीति-स्तर पर गंभीर विचार किया जाना चाहिए।
स्पष्टिकरण:
यह लेख किसी व्यक्ति, पदाधिकारी या विभाग के विरुद्ध नहीं है। यह केवल नर्सिंग व्यवस्था के संरचनात्मक सुधार पर एक नीति-आधारित, संतुलित और रचनात्मक विचार प्रस्तुत करता है।

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