“नर्सिंग भर्ती को लेकर प्रदेशभर में हलचल: 5 फरवरी को जयपुर कूच की तैयारी”
19 दिसम्बर को राजस्थान में नर्सिंग संवर्ग की पदोन्नति सूची जारी की गई।
इस अवसर पर पदोन्नत हुए सभी नर्सिंग साथियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
परंतु इसके साथ ही यह आवश्यक हो जाता है कि राजस्थान के नर्सिंग संवर्ग में वर्षों से चली आ रही पदोन्नति संबंधी गंभीर समस्याओं पर भी तथ्यात्मक और संतुलित चर्चा की जाए।
नर्सिंग ऑफिसर 4200 ग्रेड पे पर राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करता है।
लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि:
सरकारी दस्तावेज़ों और विभिन्न मांग पत्रों में स्वयं यह स्वीकार किया गया है कि:
यह स्थिति न केवल प्रशासनिक कमजोरी दर्शाती है, बल्कि नर्सिंग स्टाफ के मनोबल पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
चिकित्सक संवर्ग
नर्सिंग संवर्ग
यह असमानता नर्सिंग संवर्ग में गहरी निराशा और असंतोष का कारण बन रही है।
पिछली तीन नर्सिंग भर्तियों (2009, 2013 और 2018) में लगभग 30,000 नर्सेज लगभग 9–10 वर्षों तक संविदा सेवा देने के बाद नियमित हुईं।
ऐसी स्थिति में चिकित्सक संवर्ग की तर्ज पर नर्सिंग संवर्ग को भी:
का लाभ दिया जाना पूरी तरह न्यायसंगत और आवश्यक है।
नर्सिंग संवर्ग की अधिकांश समस्याओं का मूल कारण प्रशासनिक प्रतिनिधित्व का अभाव है।
यदि राजस्थान में स्वतंत्र नर्सिंग निदेशालय स्थापित किया जाता है, तो:
वास्तविकता यह है कि नर्सिंग निदेशालय बनने से पदोन्नति संबंधी अधिकांश समस्याएँ स्वतः ही सरल और व्यवहारिक हो जाती हैं।
यह मांग किसी विशेष लाभ या विशेषाधिकार की नहीं है, बल्कि:
की है।
एक प्रेरित और संतुष्ट नर्सिंग स्टाफ ही मज़बूत स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक नींव होता है।
क्या नर्सिंग संवर्ग के लिए स्वतंत्र नर्सिंग निदेशालय और समयबद्ध DACP/DPC अब अनिवार्य नहीं हो गया है?
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यदि आप भी नर्सिंग संवर्ग में न्यायपूर्ण पदोन्नति व्यवस्था के पक्ष में हैं, तो इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें, ताकि यह आवाज़ जिम्मेदार स्तर तक पहुँचे।
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