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राजस्थान में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। भीलवाड़ा जिले में एक डॉक्टर को 11 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा की गई, जिसने लंबे समय से चल रही शिकायत की जांच के बाद जाल बिछाकर आरोपी को पकड़ा।
यह मामला न केवल सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि गरीबों और जरूरतमंदों के इलाज के नाम पर किस तरह पैसों की मांग की जा रही थी।
जानकारी के अनुसार, आरोपी डॉक्टर पर आरोप है कि उसने एक निजी अस्पताल से आयुष्मान भारत योजना के तहत बिल पास कराने के बदले में रिश्वत मांगी थी।
अस्पताल प्रबंधन लगातार दबाव और धमकियों से परेशान था, जिसके बाद उन्होंने ACB से शिकायत करने का फैसला किया।
शिकायत की पुष्टि के बाद ACB ने पूरा प्लान तैयार किया।
सोमवार शाम को जैसे ही आरोपी डॉक्टर को 11 लाख रुपये की रिश्वत दी गई, ACB टीम ने इशारा मिलते ही कार्रवाई करते हुए उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के दौरान:
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त और बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है। लेकिन इस तरह के मामलों से यह सवाल उठता है कि:
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सख्त निगरानी और पारदर्शिता नहीं लाई जाएगी, तब तक ऐसी घटनाएं सामने आती रहेंगी।
ACB सूत्रों के अनुसार:
यदि जांच में और सबूत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।
यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश देती है कि:
साथ ही यह आम लोगों को भी जागरूक करती है कि अगर कहीं रिश्वत मांगी जाए, तो डरने के बजाय संबंधित एजेंसियों से शिकायत करें।
11 लाख की रिश्वत लेते डॉक्टर की गिरफ्तारी राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अहम कदम है।
अगर ऐसी कार्रवाइयों को लगातार और निष्पक्ष तरीके से अंजाम दिया गया, तो सरकारी योजनाओं में जनता का भरोसा और मजबूत होगा।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में कानून, प्रशासन और जनता—तीनों की भूमिका अहम है।
✍️ ARJUN HANSALIYA
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